दीपा की पांच कविताएं
स्त्री को समझो स्त्री देह नहीं, कि जब चाहा उसे बिस्तर पर रौंद डाला और अपनी विजय का दम्भ भर लिया। दरअसल, यह विजय पराजय है तुम्हारी, क्योंकि उ...
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