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शत्रुघ्न प्रसाद जीवन और साहित्य दोनों में अनुशासन के पैरोकार थे : अवधेश नारायण सिंह

शत्रुघ्न प्रसाद जीवन और साहित्य दोनों में अनुशासन के पैरोकार थे : अवधेश नारायण सिंह

ऐतिहासिक उपन्यास 'तख़्ते ताऊस' पर संगोष्ठी एवं 'आचार्य भर्तृहरि और उनका वाक्यपदीयम्' विषय पर व्याख्यान 12 जुलाई, पटना।  ...
  यशपाल और उनके उपन्यास : समाजशास्त्रीय अध्ययन -मिली रानी पाल

यशपाल और उनके उपन्यास : समाजशास्त्रीय अध्ययन -मिली रानी पाल

शोध सारांश यशपाल एक युग प्रवर्तक लेखक थे। अपने साहित्य के द्वारा सामाजिक बदलाव की दिशा में वे कार्य करते रहे। उनके उपन्यासों का समाजशास्त्री...
 भारत में आंतरिक आपातकाल (1975-1977): महिला पत्रकारों की भूमिका और संघर्ष -दशरथ सिंह राठौड़

भारत में आंतरिक आपातकाल (1975-1977): महिला पत्रकारों की भूमिका और संघर्ष -दशरथ सिंह राठौड़

शोध सारांश भारत में आंतरिक आपातकाल (1975-1977) का दौर देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे विवादास्पद कालखंड रहा है। जून 1975 में इलाहाबाद उच्च...
 पञ्चसिद्धान्तिकायाः भारतीयज्ञानपरम्परायां प्रतिबिम्बनम्  - डाॅ. रेञ्जित्पी. जी.

पञ्चसिद्धान्तिकायाः भारतीयज्ञानपरम्परायां प्रतिबिम्बनम् - डाॅ. रेञ्जित्पी. जी.

शोधसारांशः भारतीयखगोलविज्ञानस्य इतिहासे वराहमिहिरविरचितं पञ्चसिद्धान्तिका नाम ग्रन्थः अत्यन्तं महत्त्वपूर्णं स्थानं धारयति। षष्ठशताब्द्यां व...
झारखण्ड के जनजातीय लोकगीतों का महत्व - निक्की डिसूजा

झारखण्ड के जनजातीय लोकगीतों का महत्व - निक्की डिसूजा

शोध सारांश भारतीय संस्कृति में जनजातीय समुदायों ने अपनी अलग पहचान बनाए रखी है। जहाँ लोग अपनी संस्कृति को अंधविश्वास का नाम देकर लोकसंस्कृति ...